बिहार के लोगों के लिए बड़ी खबर, अब जमीन-मकान की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड अनिवार्य

बिहार के लोगों के लिए बड़ी खबर, अब जमीन-मकान की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड अनिवार्य
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बिहार में जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए एक बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। अब राज्य में 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पैन कार्ड के अब ऐसे किसी भी बड़े संपत्ति लेन-देन की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस संबंध में सभी जिला अवर निबंधकों और निबंधन कार्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला आयकर विभाग से प्राप्त पत्र के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य बड़े लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है।

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हाल ही में किए गए सर्वे और मौके पर की गई गहन जांच में बिहार के कई निबंधन कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि राज्य के विभिन्न निबंधन कार्यालयों में 10 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक की जमीन और मकान की रजिस्ट्री ऐसे मामलों में की गई, जिनमें पैन कार्ड से जुड़े नियमों का स्पष्ट रूप से पालन नहीं किया गया था। इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है और स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि बिना पैन कार्ड के 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी।

सरकार ने सभी जिला रजिस्ट्रार और अवर निबंधकों को निर्देश दिया है कि वे आयकर अधिनियम की धारा 139A और इससे संबंधित नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। यह प्रावधान बड़े वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया है। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

नए आदेश के अनुसार, यदि किसी पक्षकार के पास पैन कार्ड उपलब्ध नहीं है—कंपनी या फर्म को छोड़कर—तो उन्हें आयकर नियमावली के तहत फॉर्म-60 में घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा। निबंधन कार्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बड़े लेन-देन में या तो संबंधित व्यक्ति का पैन कार्ड दर्ज किया जाए या फिर विधिवत भरा हुआ फॉर्म-60 प्राप्त किया जाए। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि पैन कार्ड का भौतिक सत्यापन किया जाए, ठीक उसी तरह जैसे आधार कार्ड का सत्यापन किया जाता है, ताकि किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना न रहे।

इस पूरे मामले में आयकर विभाग के अपर निदेशक रूपेश अग्रवाल द्वारा इंस्पेक्टर जनरल (निबंधन) को लिखा गया पत्र भी अहम माना जा रहा है। अपने पत्र में उन्होंने बिहार के निबंधन कार्यालयों की कार्यशैली पर गंभीर आपत्ति जताई है। जांच में यह पाया गया कि राज्य के कुल 137 अवर निबंधक कार्यालयों में से 83 कार्यालयों ने अब तक फॉर्म-61 भरने के लिए आवश्यक रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

इतना ही नहीं, जिन 54 निबंधन कार्यालयों ने फॉर्म-61 के लिए रजिस्ट्रेशन कराया भी है, उन्होंने भी 10 लाख रुपये से अधिक के बड़े लेन-देन होने के बावजूद फॉर्म-61 के माध्यम से आयकर विभाग को कोई जानकारी साझा नहीं की है। आयकर नियमों के अनुसार, बिना पैन कार्ड वाले संपत्ति लेन-देन की जानकारी फॉर्म-61 के जरिए साल में दो बार आयकर विभाग को भेजना अनिवार्य है।

नियमों के तहत अप्रैल से सितंबर के बीच हुए लेन-देन की जानकारी 31 अक्टूबर तक, जबकि अक्टूबर से मार्च के बीच हुए लेन-देन की जानकारी 30 अप्रैल तक आयकर विभाग को उपलब्ध करानी होती है। इन समय-सीमाओं का पालन न करना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि इससे राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। सरकार और आयकर विभाग की इस सख्ती के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि बिहार में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और काले धन व टैक्स चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।